Wednesday , 17 July 2019
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क्या डायबिटीज़ होने पर भी आपको केला खाना चाहिए?

अगर किसी को डायबिटीज़ हो जाता है तो उस परिस्थिति में शरीर में इंसुलिन या तो कम हो जाता है या इसका उत्पादन ही बंद हो जाता है। इसके परिणामस्वरूप शरीर में शुगर (शर्करा) का लेवल बढ़ता या घटता रहता है। इसे कंट्रोल में करने के लिए व्यक्ति को अपने आहार पर विशेष रूप से ध्यान देने की जरूरत होती है, जिसमें कई फल और सब्जियां शामिल होती हैं।

ऐसे में सवाल उठता है कि क्या एक फल के रूप में केला डायबिटीज़ के मरीजों के लिए उपयोगी होता है? तो इसे लेकर तरह-तरह की बातें कही जाती है। लेकिन हम आपको इस लेख में बताने जा रहे हैं कि केला किस तरह से डायबिटीज़ के रोगियों के लिए उपयोगी है?

स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है केला

दरअसल केला फाइबर का समृद्ध स्त्रोत होने के अलावा विटामिन सी, विटामिन बी6 और पौटेशियम का भी अच्छा स्त्रोत होता है जिसके कारण इसे आहार में शामिल करना अच्छा माना जाता है। जहाँ बी6 आपके मूड को अच्छा रखता है वहीं विटामिन सी आपके प्रतिरक्षा तंत्र को मज़बूत बनाता है, पौटेशियम आपके ब्लडप्रेशर को नियमित रखता है तथा फाइबर के कारण आपका पेट काफी समय तक भरा हुआ महसूस होता है।

हाल ही में हुई एक स्टडी में दावा किया गया है कि केले में उपस्थित स्टार्च (24 ग्राम प्रतिदिन) इन्सुलिन की संवेदनशीलता को बढ़ाने और टाइप-2 डायबिटीज़ में वज़न कम करने में सहायक होता है। लिहाजा डायबिटीज़ के रोगी केले भी खा सकते हैं।

अमेरिकन डायबिटीज़ एसोसियेशन डायबिटिक लोगों को (डायबिटीज़ के मरीजों को) केला खाने के लिए प्रोत्साहित करता है। उनके अनुसार केला एक स्वस्थ आहार है जिसका सेवन करना पूर्णतया उचित है। वास्तव में अगर आप टाइप-2 के डायबिटीज़ को दूर करना चाहते हैं तो केला सबसे उत्तम फल है।

लेकिन बरतें सावधानी

माना कि केला डायबिटीज़ के रोगियों के लिए लाभकारी है लेकिन उनको यह बात ध्यान में रखनी चाहिए कि केले में कार्बोहाइड्रेट भी होते हैं तथा आपके आहार में इसे शामिल करते समय इस बात का ध्यान अवश्य रखना चाहिए। कहने का अर्थ है कि एकदम पके हुए केले से परहेज करें तो ही बेहतर है।

क्योंकि जैसे जैसे केला पकता है उसमें उपस्थित स्टार्च, शुगर (शर्करा) में बदलने लगता है। जब आप पूर्ण रूप से पका हुआ केला खाते हैं तो आप ऐसे फल का सेवन करते हैं जिसमें लगभग 90 प्रतिशत स्टार्च होता है।

यही कारण है कि शोधकर्ता कहते हैं कि कच्चा केला कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स की प्रतिक्रिया देता है। अत: पके हुए केले की तुलना में कच्चा केला अधिक श्रेष्ठ है।

इस बात का भी रखें ध्यान

बताते चलें कि डायबिटीज़ में केवल केले का सेवन ही निर्णायक कार्य नहीं करता है। इसके लिए आपको अपने आहार योजना पर ध्यान देने की जरूरत है। आप समय-समय पर डॉक्टर की सलाह लेते रहें। व्यायाम को अपनी दिनचर्या में शामिल करें और अपने ब्लड शुगर लेवल की निगरानी करते रहें। आप अपने ब्लड शुगर लेवल की निगरानी के लिए बीटओ स्मार्टफोन ग्लूकोमीटर का भी उपयोग कर सकते हैं।

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2 comments

  1. Jab mujhe pahli bar patasugar ke bare me pta chala, doctor ke pass gaya. Dr. ne mujhe bilkul dara diya khaskar kela ke bare me unhone bilkul mana kar diya kela khane se. Lekin aaj badi khushi hui iske bare me lekh padhkar. Bahut prasannata hui.

    • Hello Mr. Bhansingh,

      Humein khushi hai ke apko humara blog ko padh ke santushti hui.
      Issi tarha humare sath jude rahein aur humein aur acha karne mein protsahit karte rahein.

      Shukriya
      Team BeatO

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