Monday , 30 November 2020
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डायबिटीज़ और सूखा मेवाः आखिर कितना प्रभावी या नुकसान दायक है?

डायबिटीज़ को एक साइलेंस किलर कहा जाता है और इससे हाई बीपी, हार्ट फेल, किडनी फेल और अंधेपन जैसी न जाने कितनी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। इस खतरनाक बीमारी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसका इलाज आजतक वैज्ञानिक नहीं खोज पाएं हैं।

लेकिन अगर हेल्थ एक्सपर्ट की मानें तो सूखे मेवे का संतुलित मात्र में नियमित सेवन मधुमेह से बचाव में कारगर है। अगर नियमित व्यायाम के साथ इसका सेवन किया जाए तो शरीर में फैलने वाले इस मीठे जहर को रोका जा सकता है।

हालांकि कई लोगों का मानना है कि मेवा मीठा होता है इसलिए यह शुगर लेवल को बढ़ा देगा लेकिन ऐसा कुछ नहीं है और यह केवल एक मिथ मात्र है। वास्तव में अगर डायबिटीज़ के मरीज पिस्ता, बादाम और अखरोट का सेवन प्रतिदिन करें तो शरीर में शुगर की मात्रा को नियंत्रित किया जा सकता है।

कितना सेवन होता है लाभकारी

एक्सपर्ट के मुताबिक एक दिन में 5 से 6 बादाम, 2 अखरोट, 1 अंजीर व 1 मुनक्का का सेलन कर सकते हैं। इससे शुगर लेवल सामान्य बना रहता है।

हालांकि मूंगफली, काजू व किशमिश से परहेज करें क्योंकि इनमें अधिक मात्रा में ऑयल, फैट व शुगर पाया जाता है। जो शरीर के अंगो को धीरे-धीरे नुकसान किया पहुंचाता है।

कुल मिलाकर पार्टिकूलर अगर बादाम की बात हो तो फिर डायबिटीक हर दिन बादाम के 25 से 30 दाने रोज सुबह ले तो यह ठीक रहता है।

सूखा मेवा ही क्यों?

दरअसल सूखे मेवों में फाइबर की मात्र ज्यादा होती है, जो शुगर की मात्र को नियंत्रित करता है। जिन लोगों को मधुमेह नहीं है वह भी सूखे मेवे का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसलिए कोई भी भ्रम न पालें और आराम से सेवन करें।

इसके अलावा नियमित दिनचर्या, वर्कआउट और दवाओं के सेवन से ही इस महामारी से बचा सकता है। आप बीटओ के स्मार्टफोन ग्लूकोमीटर का इस्तेमाल करते अपने ब्लड शुगर लेवल की जांच भी नियमित रूप से कर सकते हैं और अपनी पिछली रीडिंग को बनाएं रख सकते हैं।

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