Tuesday , 18 January 2022
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विश्व डायबिटीज़ दिवसः जागरूकता है सबसे जरूरी

डायबिटीज़ आज केवल भारत ही नहीं बल्कि विश्व की एक बड़ी समस्या बन चूकी है। इसकी चपेट में विश्व अधिकांश आबादी आ चूकी है और अकेले भारत में इनकी संख्या या इससे संबंधित समस्याओं से करीब 5 करोड़ से भी अधिक लोग पीड़ित हैं। लिहाजा आज विश्व डायबिटीज़ दिवस पर इसके बारे में जानना इसके इलाजों या लक्षणों की पहचान करना बहुत जरूरी हो जाता है।

हालांकि सेहत के मामले में हर रोज नए प्रयोग हो रहे हैं लेकिन आज की आधुनिक लाइफस्टाइल के कारण तेजी से डायबिटीज का खतरा बढ़ रहा है।

हमारे देश में बहुत सारे ऐसे लोग हैं जिनके खून में शुगर की मात्रा सामान्य से अधिक या बहुत अधिक पाई गई है। डायबिटीज का खतरा इस तरह बढ़ रहा है और लोग मीठा खाने से भी कतराते हैं। खासकर चाय भी शुगर फ्री पी रहे हैं। इसका सबसे बड़ा बचाव जीवनशैली में बदलाव करना जरूरी है।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट

इस बारे में बीटओ एक्सपर्ट का कहना है कि डायबिटीज एक गैर-संचारी रोग है, लेकिन यह आम जनता के स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बन चुका है। पहले इनकी संख्या भले सीमित थी लेकिन अब यह कई मिलियन पार कर चूका है। एक ओर अस्पतालों में इनकी जहां दिन ब दिन संख्या बढ़ रही है वहीं डायबिटीज़ मैनेजमेंट एक बिजनेस का पूरा प्रारूप ले चूका है।

आज आलम ये है कि लोग डायबिटीज की विभिन्न अवस्थाओं के बारे में नहीं जानते हैं। इस बारे में हमारे एक्सपर्ट का कहना है कि अगर महिला डायबिटीज से पीड़ित है तो उस स्थिति में गर्भस्थ शिशु और मां दोनों के लिए खतरे की बात होती है। ऐसे में गर्भपात की आशंका बढ़ जाती है।

  • अगर गर्भ में बच्चा पूर्ण विकसित हो जाता है तो प्रसव के दौरान बच्चों का आकार सामान्य से बड़ा होने की स्थिति में सर्जरी ही डिलिवरी का एकमात्र विकल्प होता है।
  • उन्होंने कहा कि गर्भधारण से पहले जीडीएम के प्रसार के लिए यह जरूरी नहीं कि उस महिला को पहले से मधुमेह हो। न ही यह बीमारी की स्थायी स्थिति है। हालांकि, गर्भावस्था के दौरान मधुमेह होने का जोखिम मां और बच्चे दोनों को होता है। जागरूकता से इसे रोका जा सकता है।
  • डायबिटीज़ को लेकर जानकारी शहरी और शिक्षित लोगों के बीच में भी बहुत कम है। यह एक मूक बीमारी बन गई है, जिसका पता गर्भावस्था के बाद आखिरी स्टेज में उस वक्त चलता है जब इससे संबंधित कुछ जटिलताएं सामने आती हैं।

क्या क्या हो सकता है नुकसान

बीटओ की एक्सपर्ट के मुताबिक डायबिटीज़ जैसी गंभीर बीमारी में बार-बार पेशाब का आना, आंखों की रोशनी कम होना, कोई भी चोट या जख्म देरी से भरना, हाथों, पैरों पर खुजली वाले जख्म, बार-बर फोड़े-फुंसियां निकलना, चक्कर आना, चिड़चिड़ापन अगर आप को भी इनमें से कोई लक्षण अपनी शरीर में नजर आता है तो इसे नजरअंदाज न करें।

  • डायबिटीज़ मूलतः लाइफस्टाइल से प्रभावित होने वाली बीमारी है और इसलिए इसका इलाज संभव लाइफस्टाइल में ही बदलाव लाकर किया जा सकता है। इसके लिए एक ओर जहां आपको बेहतर खान-पान, व्यायाम की जरूरत होती है वहीं दूसरी ओर आपको डॉक्टर की नियमित जांच की भी आवश्यकता होती है।
  • आपको अपने ब्लड शुगर लेवल की नियमित जांच की भी जरूरत पड़ती है जिसके लिए आप बीटओ स्मार्टफोन ग्लूकोमीटर का भी उपयोग कर सकते हैं। बता दें कि बीटओ एक डायबिटीज़ केयर मैनेजमेंट कंपनी है जो इस प्रकार के रोगियों का इलाज से लेकर परामर्श तक की सुविधाएं मुहैया कराती है।

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