Tuesday , 27 July 2021
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डायबिटीज़ और पीरियडः आपको पता होनी चाहिए ये बातें

माहवारी यानि पीरियड्स महिलाओं को महीने में एक बार आता है। इस दौरान महिलाओं के शरीर में कई हार्मोनल उतार-चढ़ाव देखने को मिलते हैं। ऐसे में हार्मोनल उतार-चढ़ाव उनकी बॉडी सिस्टम के साथ-साथ प्रजनन सिस्टम को भी प्रभावित कर सकता है। डायबिटीज़ से जूझ रही महिलाओं को कभी-कभी हार्मोनल इंटरैक्शन के कारण कई कठिन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। हम इस लेख में इन्हीं चुनौतियों और उनके समाधान के बारे में चर्चा जा रहे हैं..

  1. कई बार ब्लड ग्लूकोज को कंट्रोल करना मुश्किल हो जाता है.

पीरियड के दौरान डायबिटीज़ से जूझ रही महिलाओं का कई बार उनके ब्लड ग्लूकोज लेवल पर नियंत्रण रख पाना संभव नहीं हो पाता है। कई बार यह पीरियड के चक्र को भी प्रभावित करता है।

अध्ययन के अनुसार प्रोजेस्टेरोन इंसुलिन प्रतिरोध में वृद्धि से जुड़ा हुआ है। इसका मतलब है कि आपके पीरियड के दूसरे भाग में प्रोजेस्टेरोन का लेवल स्वाभाविक रूप से अधिक होता है।

अगर आप अपने आहार को बेहतर नहीं करती हैं या व्यायाम नहीं करती हैं तो इस प्रतिरोध के परिणामस्वरूप हाइपरग्लाइसिमिया की शिकायत भी उत्पन्न हो सकती है। भोजन में कार्बोहाइड्रेट की कमी के गंभीर परिणाम देखने को मिल सकते हैं। व्यायाम न करना कई प्रकार की जटिलताओं का कारण बन सकता है। ये दोनों चीजें समय के साथ डायबिटीज़ की स्थिति को खतरनाक स्तर तक ले जा सकता हैं।

ऐसे में अगर आप भी डायबिटीज़ से जूझ रही हैं तो आहार पर ध्यान रखना और नियमित अभ्यास का पालन करना बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है।

  1. पीरियड में देरी और प्रारंभिक रजोनिवृत्ति.

टाइप – 2 डायबिटीज़ से पीड़ित महिलाओं को अनियमित माहवारी होने का खतरा सामान्य से ज्यादा होता है। हालांकि माहवारी में अनियमितताओं के कई कारण हो सकते हैं जिनमे गर्भावस्था, हार्मोन असंतुलन,संक्रमण,बीमारियां, शॉक लगने और कुछ विशेष ड्रग्स का सेवन करना जैसे कई कारण हो सकते हैं।

टाइप 2 डायबिटीज़ पॉली सिस्टिक डिम्बग्रंथि सिंड्रोम या पीसीओएस नामक स्थिति का हिस्सा हो सकता है। यदि आपके पास पीसीओएस है, तो आपके डिम्बग्रंथि हार्मोन उत्पादन में असंतुलन होने की संभावना है। यह असंतुलन नियमित अंडाशय को अनियमित चक्रों के परिणाम स्वरूप रोकता है।

  1. ज्यादा वजन अनियमित पीरियड का कारण बन सकता है.

हालांकि टाइप 2 डायबिटीज़ उन महिलाओं को भी हो सकती है जिनका वजन ज्यादा नहीं है, लेकिन अगर आप टाइप 2 डायबिटीज़ से जूझ रही हैं तो आपमें यह समस्या उत्पन्न होने की संभावना ज्यादा हो सकती है। इसलिए वजन घटाने का प्रयास करें।

अंडरलाइन इंसुलिन रेसिस्टेंस की वजह से यह स्थिति इंसुलिन के ऊंचे स्तर से भी जुड़ी हुई है। ऐसे में आपका वजन जितना अधिक होगा, पीरियड उतना ही अनियमित होगा।

हालांकि ध्यान देने वाली बात ये है कि टाइप-2 डायबिटीज़ होने के कारण प्रजनन क्षमता पर पड़ने वाले असर के बारे में वैज्ञानिक अभी बहुत श्योर नहीं हैं। अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ कोलोराडो की मेगान केल्से का कहना है कि टाइप- 2  डायबिटीज़ से पीड़ित लड़कियों में माहवारी संबंधी समस्याओं का पता लगाना आवश्यक है। इस पर शोध किए जा रहे हैं।

ऐसे में अगर आप डायबिटीज़ या पीरियड से जुड़ी किसी समस्या से जूझ रही हैं तो आपके लिए जरूरी है कि आप अपने हेल्थ पर ध्यान दें और व्यायाम व हेल्दी खान-पान को अपनी लाइफस्टाइल का हिस्सा बनाएं।

आप समय-समय पर अपने डॉक्टर की सलाह लेती रहे और अपने ब्लड ग्लूकोज लेवल को कंट्रोल में रखना सुनिश्चित करें। अपने ब्लड ग्लूकोज की रीडिंग के लिए आप बीटओ स्मार्टफोन ग्लूकोमीटर का उपयोग कर सकती हैं।

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