Wednesday , 2 December 2020
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सावधानः बच्चों में मोटापा बन सकता है डायबिटीज़ की वजह

आधुनिक जीवनशैली का असर केवल बड़े-बुजुर्गों में ही नहीं, बल्कि बच्चों में भी देखा जा रहा है, जिसके कारण बच्चों में बढ़ता मोटापा आज चिंता का विषय बन चुका है। एक्सपर्ट के मुताबिक अगर मोटापे पर जल्दी कंट्रोल नहीं किया गया तो यह कई बीमारियों का कारण बन सकता है, जिनमें डायबिटीज़ भी शामिल है।

आपको बच्चों में डायबिटीज़ की समस्या की बात सुनकर थोड़ा अजीब लगेगा, लेकिन अब यह बीमारी बच्चों में भी तेजी से अपना पैठ बना रहा है। इसके पीछे का कारण बताते हुए एक्सपर्ट कहते हैं कि लगातार टीवी देखना, इंटरनेट चलाना, गेमिंग डिवाइसेज पर समय बिताना, खेल-कूद की कमी, जंक फूड का सेवन और निष्क्रिय जीवनशैली बच्चों में विभिन्न तरह की समस्याओं का कारण बन रहा है।

दरअसल अनियमित और आलस्य भरी लाइफस्टाइल के कारण बच्चों में मोटापे की समस्या बढ़ रही है और इसका घातक परिणाम डायबिटीज़ के रूप में सामने आ रहा है। डायबिटीज़ का बुरा असर शरीर के हर अंग पर पड़ता है।

दिल्ली में बूरे हालात 

पिछले साल किए गए एक सर्वेक्षण में पाया गया है कि दिल्ली में लगभग 35 फीसदी किशोरों का वजन सामान्य से अधिक है या वे मोटापे से ग्रस्त हैं।

इसे लेकर एक्सपर्ट का कहना है कि आजकल बच्चे खेल-कूद के बजाए इन्डोर गतिविधियों में ज्यादा समय बिताते हैं।

डायबिटीज़ नवजात बच्चों को भी प्रभावित कर सकता है और ज्यादातर लोग इसके बारे में नहीं जानते हैं। नियोनेटल डायबिटीज़ बच्चों में छह माह की उम्र से पहले भी हो सकता है।

डायबिटीज़ से पीड़ित हैं दिल्ली में 32 लाख बच्चे

एक अनुमान के अनुसार अकेले दिल्ली में 32 लाख बच्चे डायबिटीज़ से पीड़ित हैं। ज्यादातर मामलों में ये बच्चे मोटापे का शिकार होते हैं या इनका वजन सामान्य से अधिक होता है।

बच्चों में मोटापा टाईप-2 डायबिटीज़ का कारण बन सकता है, लेकिन समय पर इलाज कराके रोग के लक्षणों को नियन्त्रण में रखा जा सकता है और प्री डायबिटीज़ को डायबिटीज़ में बदलने से रोका जा सकता है।

क्या है बचाव

डायबिटीज़ का मुख्य कारण असेहतमंद जीवनशैली है और अच्छी आदतों द्वारा इस पर नियन्त्रण पाया जा सकता है। इसके लिए काबोर्हाइड्रेट का सेवन सीमित मात्रा में करें। फाईबर और प्रोटीन से युक्त आहार लें। हरी सब्जियों, फलों, फलियों और साबुत अनाज का सेवन करें।

अगर परिवार में डायबिटीज़ का इतिहास है तो आपको नियमित रूप से अपने ब्लड शुगर की जांच करवानी चाहिए। अपने ब्लड प्रेशर, कॉलेस्ट्रॉल, ट्राई ग्लीसराईड पर नियन्त्रण रखें। डायबिटीज़ दिल की बीमारियों का कारण भी बन सकता है। इसलिए ब्लड प्रेशर और कॉलेस्ट्रॉल को नियंत्रण रखना बहुत जरूरी है।

सबसे पहले अपने वजन पर नियन्त्रण रखें। ब्लड शुगर को नियन्त्रण में रखने के लिए बीएमआई सही होना बहुत जरूरी है। आप ब्लड शुगर लेवल की निगरानी के लिए बीटओ स्मार्टफोन ग्लूकोमीटर की मदद ले सकते हैं।

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