Tuesday , 7 April 2020
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मीठा या सफेद आलूः जानिए क्या है बेहतर विकल्प?

दुनिया भर में गेहूं, चावल और मकई के बाद अगर किसी चीज़ का सबसे ज्यादा सेवन किया जाता है तो वह आलू है। आलू से दुनिया भर में विभिन्न खट्टे, मीठे व मसालेदार पकवान बनाए जाते हैं और इसलिए इसकी लोकप्रियता भी बहुत है, लेकिन इन सबके बावजूद भी इसे स्टार्च से भरपूर होने के कारण  स्वास्थ्य के लिहाज़ से खराब रेटिंग प्राप्त हुई है।

कई बार आलू को उसके ज़्यादा शुगर लेवल के कारण भी बदनाम किया जाता है, जबकि पिछले कुछ वर्षों में यह ट्रेंड बदल गया है। अब मीठे आलू को हेल्थ के साथी के रूप में प्रचारित किया जाता है। ऐसे में हर व्यक्ति के लिए यह जानना आश्चर्यजनक हो सकता है कि मीठे आलू और सफेद आलू में अंतर क्या होता है?

आपको जानकर आश्चर्य होगा कि ये दोनों सब्जियां हेल्दी बॉडी के लिए कई खनिजों और विटामिन्स की ज़रूरत को पूरा करती हैं, लेकिन न्यूट्रीशन के मामले में ये दोनों एक-दूसरे से बहुत अलग हैं। हम इस लेख में  इन दोनों के अंतर को स्पष्ट करने जा रहे हैः

मीठे और सफेद दोनों आलू को हेल्दी कार्बोहाइड्रेट स्रोत के रूप में जाना जाता है और दोनों में कार्बोहाइड्रेट की एक ही मात्रा होती है (उदाहरण के लिए आधे कप में 15 ग्राम कार्बोज होते हैं)। मीठे आलू में अधिक फाइबर होता है और सफेद आलू की तुलना में इसमें कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स होता है।

इस कारण से, सफेद आलू की तुलना में ब्लड ग्लूकोज़ का लेवल मीठे आलू के साथ धीरे-धीरे कम हो सकता है। अगर आप डायबिटीक हैं, तो कार्बोहाइड्रेट समृद्ध खाद्य पदार्थों के हिस्से के आकार और वितरण के महत्व को याद रखें। मीठे आलू भी एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होते हैं। वे विटामिन सी, प्रो-विटामिन ई, बीटा कैरोटीन, स्पोरैमिन्स और एंथोकाइनिन में समृद्ध होते हैं।

कई अध्ययनों में पता चला है कि एंटीऑक्सीडेंट से युक्त समृद्ध खाद्य पदार्थ खाने से कैंसर और हृदय रोग जैसी निश्चित पुरानी बीमारियों के विकसित होने का खतरा कम हो सकता है। एंथोकाइनिन के जरिए हाई फैट वाले आहार से वज़न को कम किया जा सकता है और ये स्पोरैमिन्स में एंटी-कैंसरजन्य गुण से भी लैस हो सकते हैं।

ग्लाइसेमिक इंडेक्स आमतौर पर खाने के बाद ब्लड शुगर के लेवल की वृद्धि को मापता है। हाई ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले भोजन से ब्लड ग्लूकोज़ लेवल में तेजी से वृद्धि होता है और इस प्रकार पैनक्रिया को अधिभारित भी किया जाता है।

नतीजतन, व्यक्तियों को हाई ब्लड शुगर लेवल या लो ब्लड शुगर लेवल का अनुभव नहीं होता है। दूसरे शब्दों में, ब्राउन राइस और मीठे आलू जैसे कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले भोजन आपको पूर्णता महसूस कराते हैं।

कुल मिलाकर अंत में हम यह साफ तौर पर कह सकते हैं कि मीठा और सफेद दोनों आलू आपके लिए लाभकारी है। हालांकि अगर आप डायबिटीज़ से जूझ रहे हैं तो सफेद आलू की तुलना में मीठे आलू को चुनने की सिफारिश की जाती है, क्योंकि सफेद आलू की तुलना में इसका अधिक लाभ होता है।

आपको बताते चलें कि डायबिटीज़ की परिस्थिती में केवल आलू का सेवन करना ही पर्याप्त नहीं होता है। आपको अपने खान-पान को दुरूस्त रखना होगा। अपनी दिनचर्या में व्यायाम को शामिल करना होगा, रोज समय पर दवाइयां लेना होगा और नियमित तौर पर ब्लड ग्लूकोज़ लेवल की निगरानी करनी होगी।

आप अपने ब्लड ग्लूकोज़ लेवल की निगरानी के लिए बीटओ स्मार्टफोन ग्लूकोमीटर का उपयोग करना चाहिए। यह कहीं भी, कभी भी आपके ब्लड शुगर लेवल की सटीक रीडिंग देने में सक्षम है।

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