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डायबिटीज के प्रकार

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डायबिटीज के प्रकार
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डायबिटीज एक दीर्घकालिक(लम्बे समय तक चलने वाली) मेटाबोलिक संबंधी समस्या है, जो दुनिया भर में लाखों लोगों को प्रभावित कर रही है। यह तब होता है जब शरीर ब्लड ग्लूकोज लेवल को ठीक से नियंत्रित करने में असमर्थ होता है, जिससे विभिन्न स्वास्थ्य समस्याए पैदा होती हैं। एक सही डायबिटीज मैनेजमेंट और सम्पूर्ण कल्याण को बनाए रखने के लिए डायबिटीज के प्रकार को समझना महत्वपूर्ण है। इस ब्लॉग में, डायबिटीज के तीन मुख्य प्रकारों – टाइप 1, टाइप 2 और गर्भकालीन डायबिटीज पर चर्चा करेंगे और डायबिटीज मैनेजमेंट में शुगर जाँच मशीन और ब्लड शुगर टेस्ट किट, जैसे Beato ग्लूकोमीटर स्ट्रिप्स, के महत्व के बारे में जानेंगे।

डायबिटीज क्या है?

डायबिटीज एक लंबे समय तक चलने वाली स्वास्थ्य स्थिति है जो आपके शरीरमे बनने वाले ग्लूकोज से जुड़ी हुई है। आपका शरीर भोजन को ग्लूकोज में बदलता है और इसे आपके रक्तप्रवाह में छोड़ देता है। जब आपका ब्लड शुगर बढ़ जाता है और इंसुलिन बनना बंद हो जाता है, इसी स्थिति को डिबेट्स कहा जाता है।

डायबिटीज होने के कारण

डायबिटीज के प्रकार और कारण उम्र और मेडिकल कंडीशन के आधार पर अलग-अलग हो सकते हैं। यदि आपके माता-पिता को डायबिटीज रही है, तो बच्चों में भी इसका खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा खाने में चीनी युक्त चीजों का अधिक सेवन, शारीरिक गतिविधि में कमी, मोटापा आदि के कारण भी इसका जोखिम बढ़ जाता है। समय के साथ डायबिटीज के कारण हृदय रोग, हार्ट अटैक, स्ट्रोक, न्यूरो, आंख और कान से संबंधित समस्याएं भी हो सकती हैं।

यह भी पढ़ें: डायबिटीज और डिप्रेशन के बीच क्या सम्बन्ध है?

डायबिटीज के प्रकार

डायबिटीज को सही समय पर पहचानना और उस का उपचार किसी भी व्यक्ति को इस के गंभीर परिणामों से बचाने में मदद कर सकता है। यहाँ डायबिटीज के निम्नलिखित प्रकार दिए गए है:

  1. टाइप 1 डायबिटीज: एक ऑटोइम्यून स्थिति

डायबिटीज के प्रकार में सब से पहले आता है टाइप 1 डायबिटीज। जिसे एक ऑटोइम्यून स्थिति माना जाता है। जिसे किशोर डायबिटीज या इंसुलिन-निर्भर डायबिटीज के रूप में भी जाना जाता है, यह एक ऑटोइम्यून स्थिति है जहां प्रतिरक्षा प्रणाली अग्न्याशय में इंसुलिन-उत्पादक बीटा कोशिकाओं पर हमला करती है और उन्हें नष्ट कर देती है। परिणामस्वरूप, शरीर इंसुलिन का उत्पादन नहीं कर पाता, जो कोशिकाओं में प्रवेश करने और शरीर को ऊर्जा प्रदान करने के लिए ग्लूकोज के लिए आवश्यक हार्मोन है। टाइप 1 डायबिटीज वाले व्यक्ति को अपने ब्लड शुगर लेवल को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने के लिए इंसुलिन इंजेक्शन की आवश्यकता होती है। ग्लूकोज के स्तर की निगरानी और साथ ही इंसुलिन खुराक का सही समय बनाये रखने के लिए शुगर जांच उपकरण और ब्लड शुगर टेस्ट किट का नियमित उपयोग महत्वपूर्ण है।

  1. टाइप 2 डायबिटीज: जीवनशैली और आनुवंशिकी

टाइप 2 डायबिटीज, डायबिटीज के प्रकार का सबसे आम रूप है और अक्सर जीवनशैली कारकों से जुड़ा होता है, जैसे कि सही खान पान की कमी, गतिहीन दिनचर्या और मोटापा। इसमें आनुवंशिक (जेनेटिक) कराक भी हो सकते हैं। टाइप 2 डायबिटीज में, शरीर या तो इंसुलिन के प्रभाव का विरोध करता है या सामान्य शुगर लेवल को बनाए रखने के लिए पर्याप्त इंसुलिन का उत्पादन नहीं कर पाता है। शुरुआत में, जीवनशैली में बदलाव, जैसे स्वस्थ खान पान, नियमित व्यायाम और वजन प्रबंधन, टाइप 2 डायबिटीज को प्रबंधित करने के लिए पर्याप्त हो सकते हैं। हालाँकि, कुछ लोगों को आखिर में दवाओं या इंसुलिन थेरेपी की आवश्यकता हो सकती है। ग्लूकोज के स्तर को नियंत्रण में रखने और समस्याओं को रोकने के लिए शुगर जांच उपकरण और ग्लूकोमीटर का उपयोग करके अपने शुगर की नियमित जाँच आवश्यक है।

  1. गर्भकालीन डायबिटीज: गर्भावस्था के दौरान होने वाली

डायबिटीज के प्रकार में गर्भकालीन डायबिटीज गर्भावस्था के दौरान विकसित होती है, जब हार्मोनल परिवर्तन इंसुलिन संवेदनशीलता को प्रभावित कर सकते हैं। यह आमतौर पर दूसरी या तीसरी तिमाही में होता है और आमतौर पर बच्चे के जन्म के बाद ठीक हो जाता है। हालाँकि, जिन महिलाओं को गर्भकालीन डायबिटीज का अनुभव होता है, उनमें आने वाले समय में टाइप 2 डायबिटीज होने का खतरा बढ़ जाता है। गर्भावस्था के दौरान माँ और बच्चे दोनों की भलाई सुनिश्चित करने के लिए शुगर जाँच उपकरण और ब्लड शुगर टेस्ट किट का उपयोग करके शुगर लेवल की निगरानी करना महत्वपूर्ण हो जाता है। ऐसे में जीवनशैली में बदलाव, जैसे स्वस्थ खान -पान और नियमित व्यायाम की सलाह दी जाती है, और कुछ मामलों में, इंसुलिन थेरेपी आवश्यक हो सकती है।

डायबिटीज के लक्षण-

डायबिटीज के लक्षण अचानक सामने आ सकते हैं। टाइप 2 डायबिटीज में, लक्षण हल्के हो सकते हैं और ध्यान में आने में कई साल लग सकते हैं। डायबिटीज के कुछ सामान्य लक्षणों में शामिल हैं:

  • बहुत प्यास लगना
  • सामान्य से अधिक बार पेशाब जाना
  • धुंधली दृष्टि
  • थकान महसूस करना
  • अनजाने में वजन कम होना
  • घाव न ठीक होना

FAQ

टाइप 1 डायबिटीज और टाइप 2 डायबिटीज में क्या अंतर है?

टाइप 1 डायबिटीज आम तौर पर बच्चों और युवा वयस्कों में विकसित होती है, हालांकि यह आमतौर पर बड़े वयस्कों में मौजूद हो सकता है। टाइप 1 डायबिटीज शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली द्वारा बीटा सेल्स में इंसुलिन उत्पादक सेल्स को नष्ट करने के कारण होता है। टाइप 1 डायबिटीज की स्थिति का प्रभावी ढंग से इलाज करने के लिए इंसुलिन इंजेक्शन की आवश्यकता होती है।
टाइप 2 डायबिटीज आमतौर पर वयस्कों में विकसित होता है और मोटापे से जुड़ा होता है। हालाँकि, टाइप 2 डायबिटीज वाले सभी रोगी मोटापे से ग्रस्त नहीं होते हैं और वास्तव में, सभी मोटे व्यक्तियों में टाइप 2 डायबिटीज विकसित नहीं होती है। टाइप 2 डायबिटीज से ग्रसित व्यक्ति को सामान्य ग्लूकोज स्तर बनाए रखने के लिए बड़ी मात्रा में इंसुलिन का उत्पादन करने की आवश्यकता होती है। टाइप 2 डायबिटीज वाले अधिकांश रोगियों को शुरू में जीवनशैली सलाह (वजन घटाने के लिए आहार और व्यायाम) और गोलियों से नियंत्रित किया जा सकता है। हालाँकि, टाइप 2 मधुमेह वाले रोगियों को अक्सर इंसुलिन थेरेपी की आवश्यकता होती है जब उनका ग्लूकोज स्तर जीवनशैली और गोलियों से नियंत्रित नहीं होता है।

HbA1c क्या है?

HbA1c (हीमोग्लोबिन A1c, जिसे ग्लाइकेटेड हीमोग्लोबिन के रूप में भी जाना जाता है) एक ब्लड टेस्ट है जिसका उपयोग क्लिनिक में यह निर्धारित करने के लिए किया जाता है कि डायबिटीज से ग्रसित व्यक्ति का ब्लड ग्लूकोज लेवल कितना नियंत्रित है। HbA1c उपयोगी जानकारी प्रदान करता है कि 2 से 3 महीने की अवधि में डायबिटीज से ग्रसित व्यक्ति का औसत ब्लड ग्लूकोज स्तर क्या रहा है।

मुझे हाइपोस (निम्न शुगर लेवल) से कैसे निपटना चाहिए?

यदि आप का शुगर लेवल नियमित रूप से हो लो हो रहा है, तो यह पता लगाना महत्वपूर्ण है कि ऐसा क्यों हो रहा है और इसे दोबारा होने से रोकने का लक्ष्य रखें। यदि आप हाइपोग्लाइकेमिया से बचने के बारे में सही मार्गदर्शन चाहते है तो अपने डॉक्टर से इस बारे में तुरंत सलाह ले। जब आपका शुगर लेवल 70 mg/dL से कम हो जाए तो इसे लो ब्लड शुगर कहा जाता है, ऐसे में इसे नियंत्रण में बनाए रखने के लिए आपको एक्सपर्ट की सलाह की जरूरत पड़ सकती है। टाइप 1 डायबिटीज वाले लोगों में निम्न शुगर लेवल विशेष रूप से सामान्य होता है। लो ब्लड शुगर लेवल को यदि बिना इलाज के छोड़ दिया जाए तो यह खतरनाक साबित हो सकता है।

क्या डायबिटीज को पूरी तरह खत्म किया जा सकता है?

अब तक कोई डायबिटीज का सटीक इलाज नहीं है, लेकिन उचित दवाओं, आहार और व्यायाम से इसे नियंत्रित किया जा सकता है।

उम्मीद है आपको इस ब्लॉग से डायबिटीज के प्रकार के बारे में जानकारी मिल गई होगी। स्वास्थ्य से जुड़ी ऐसी ही महत्पूर्ण जानकारी और एक सही डायबिटीज मैनेजमेंट के बारे में जानने के लिए BeatO के साथ बने रहिये।

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Jyoti Arya

Jyoti Arya

As a professional content writer, I am a curious and self-motivated storyteller. Experienced of writing buzz-worthy feature articles, blogs, reviews, audio books and content marketing pieces. I have experience of the development of fictional and nonfictional content. I am passionate about bringing ideas to life and crafting compelling content to captivate audiences.

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